गर्व और शान
गर हम सिंह पे सवार होते,
राजपूत ना होते तो यकीनन खतार होते।
तलवार से खेलते हैं, हम तूफानों का डर नहीं,
शेरों के संग चलते हैं, कभी भी किसी से डर नहीं।
वीरता
सर कटाने का जिगर रखता है,
जो राजपूत है वो कभी किसी से नहीं डरता है।
दिल में हो जुनून, सिने में हो दम,
बस वही सच्चा राजपूत कहलाता है, हर कदम।
मरने का डर नहीं, जिंदा रहने की चाह नहीं,
राजपूत का सिर झुके, ऐसी कोई राह नहीं।
राजपूत की आन
तलवार की धार और राजपूत की शान,
ये दोनों कभी नहीं झुकते किसी के आगे।
सिंह की दहाड़ हो या राजपूत का नाम,
दुश्मन भी कांपते हैं सुनकर हमारे काम।
शेर का शिकार करना राजपूत की पहचान,
शान से जीना और मर जाना उनकी आन।
राजपूताना शान
राजपूताना है हमारा, हम राजपूत कहलाते हैं,
वीरता और शौर्य से हम अपना सिर ऊँचा उठाते हैं।
जिनके लिए तलवार ही उनकी जान है,
ऐसे राजपूतों की कभी न मिटेगी शान है।
हम वो हैं जो मौत को भी चकमा दे जाएँ,
राजपूत हैं हम, हर कदम पर अपनी ताकत दिखाएँ।
बहादुरी की कहानियाँ हर दिल में बसी हैं,
राजपूतों की शान से दुनिया हिलती रही है।
राजपूत का दिल
दिल में बसती है हमारे माँ भवानी,
उनके आशीर्वाद से हम हर जंग जीते मानी।
हिम्मत की कमी नहीं, बहादुरी की पहचान हैं,
हम राजपूत हैं, हमारे दिल में बसती माँ भवानी की शान हैं।
दुश्मनों का सामना हम सदा करते रहे हैं,
राजपूतों की वीरता के किस्से हर ओर चलते रहे हैं।
गर्व है हमें अपने राजपूत होने पर,
सर उठा कर जियें और हमेशा मरने को तैयार।
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